उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) इस समय गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। निगम पर देनदारियों का कुल बोझ 100 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। रोडवेज की आय के मुकाबले उसका खर्च 30 प्रतिशत ज्यादा हो रहा है।
निगम की रोजाना औसत आय करीब 1.75 करोड़ रुपये है, जबकि संचालन और अन्य मदों में रोजाना 2.25 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इस भारी घाटे के कारण निगम अपनी बुनियादी देनदारियां भी पूरी नहीं कर पा रहा है। वित्तीय संकट के चलते कर्मचारियों का पिछले दो माह का करीब 40 करोड़ रुपये का वेतन बकाया है। कर्मचारियों के वेतन से काटी जाने वाली सहकारी समितियों की 24 करोड़ रुपये की राशि सितंबर से जमा नहीं की गई है। इसके अलावा रिटायर कर्मचारियों के देयक और अनुबंधित बस स्वामियों का भुगतान भी अधर में लटका है।
यात्रा सीजन पर टिकी उम्मीदें
निगम प्रबंधन अब आगामी पर्यटन और चारधाम यात्रा सीजन की ओर टकटकी लगाए बैठा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने से आय में सुधार होगा और देनदारियों का बोझ कम किया जा सकेगा।
काशीपुर डिपो में चालान कटौती पर आक्रोश
एक ओर रोडवेज आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, वहीं उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने काशीपुर डिपो के 41 चालक-परिचालकों के वेतन से चालान की राशि काटे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। यूनियन का कहना है कि आनंद विहार बस अड्डे पर जाम के कारण चालान हुए, जिसमें कर्मचारियों की कोई गलती नहीं थी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह कटौती नहीं रुकी तो वे कठोर कदम उठाने को बाध्य होंगे।
रोडवेज पर जो देनदारियां हैं उनको धीरे-धीरे कम किया जा रहा है। अब सीजन शुरू होने वाला है। सीजन में आय बढ़ने की उम्मीद है। नई बसें आने के बाद इनकम बढ़ेगी।
-क्रांति सिंह, महाप्रबंधक (संचालन), रोडवेज











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